One Child One Family: केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री रामदास आठवले के नेतृत्व वाली रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (Republic Party of India) ने कहा कि वह वन फैमिली वन चाइल्ड (One Family One Child) पर कानून लाने के लिए जल्द ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने एक प्रस्ताव रखेगी. पार्टी ने कहा कि देश की बढ़ती जनसंख्या पर लगाम लगाने के लिए एक परिवार में एक ही बच्चे की पॉलिसी होनी चाहिए.Also Read - केन्द्रीय मंत्री रामदास आठवले की पीएम मोदी से मांग- क्षत्रियों को मिले 10 प्रतिशत आरक्षण

गुजरात के उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल की हिंदुओं के अल्पसंख्यक होने की टिप्पणी के बारे में पूछे जाने पर आठवले ने कहा, गुजरात के उपमुख्यमंत्री के अपने विचार हो सकते हैं. लेकिन मेरा मानना है कि हिंदुओं के अल्पसंख्यक होने का कोई सवाल ही नहीं है. हिंदू या मुस्लिम आबादी का जनसंख्या हिस्सा जस का तस बना रहेगा. ऐसा नहीं है कि पिछले कुछ वर्षों में देश में मुस्लिम आबादी अचानक से बढ़ी है. Also Read - अगले लोकसभा चुनाव को लेकर बोले रामदास अठावले, '2024 में खेला नहीं सत्ता के लिए मोदी का मेला होगा'

रामदास आठवले ने अहमदाबाद में मीडिया से कहा- बढ़ती जनसंख्या हमारे देश के लिए चिंता की बात है. अगर हमें अपने देश का विकास करना है तो हमारी आबादी को कम करना होगा. पहले परिवार नियोजन के लिए हम दो, हमारे दो का नारा था, लेकिन यह हमारी पार्टी का विचार है कि अब यह हम दो, हमारा एक होना चाहिए. Also Read - Maharashtra Lockdown Update: केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले की महाराष्ट्र सरकार से अपील- बकरीद पर प्रतिबंधों में ढील के साथ-साथ...

केंद्रीय मंत्री ने कहा, हम इसे पूरा करने के लिए एक कानून लाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) के सामने एक प्रस्ताव रखेंगे. हम ऐसा कानून लाने की कोशिश करेंगे और उम्मीद करते हैं कि ऐसा कानून लागू होगा. आठवले ने संविधान में बदलाव की आशंकाओं को भी खारिज कर दिया. उन्होंने कहा, किसी के पास ऐसा करने की शक्ति नहीं है. कई लोगों द्वारा अफवाहें फैलाई जा रही हैं कि भारतीय जनता पार्टी संविधान बदल देगी, मोदी संविधान बदल देंगे. अगर मोदीजी बाबा साहब के संविधान का समर्थन करते हैं, तो उनकी ओर से इसे बदलने का कोई सवाल ही नहीं है. अगर मोदीजी संसद में सिर झुका रहे हैं, इसका मतलब है कि वे संविधान का सम्मान करते हैं, तो वे इसे कैसे बदल सकते हैं? संविधान बदलने की ताकत किसी के पास नहीं है.