सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को 1984 के सिख विरोधी दंगों के दोषी और कांग्रेस के पूर्व नेता सज्जन कुमार द्वारा चिकित्सा आधार पर जमानत मांगने वाली याचिका को खारिज कर दिया. न्यायमूर्ति संजय किशन कौल की अध्यक्षता वाली पीठ ने कुमार के वकील से कहा कि उन पर जघन्य अपराधों का आरोप है. आप चाहते हैं कि उनके साथ किसी सुपर VIP मरीज की तरह व्यवहार किया जाए.Also Read - Reliance Infra: सुप्रीम कोर्ट से अनिल अंबानी को मिली बड़ी जीत, रिलायंस इंफ्रा को मिलेंगे 4600 करोड़ रूपये

सज्जन कुमार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रंजीत कुमार ने पीठ के समक्ष दलील दी कि उनके मुवक्किल की तबीयत बिगड़ रही है और उनका वजन भी काफी कम हो गया है. कुमार के वकील ने एक डॉक्टर द्वारा उनके स्वास्थ्य पर एक रिपोर्ट का भी हवाला दिया. हालांकि, बेंच में जस्टिस एम. एम सुंदरेश ने सज्जन कुमार की उस याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया, जिसमें उन्होंने अपने स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों के इलाज के लिए उन्हें मेदांता अस्पताल में स्थानांतरित करने की मांग की थी. Also Read - Relief for future group: फ्यूचर ग्रुप को राहत, सुप्रीम कोर्ट ने लगाई अमेजन मामले में दिल्ली हाई कोर्ट में सभी सुनवाई पर रोक

सज्जन कुमार के वकील द्वारा कहा गया कि वह स्वयं खर्च वहन करेंगे. उनके वकील ने आगे कहा कि उन्हें पेट से जुड़ी काफी गंभीर जटिलताएं हैं और उनका वजन भी काफी कम हो गया है. शीर्ष अदालत ने मेडिकल बोर्ड द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट पर विचार किया, जिसमें बताया गया था कि उनके स्वास्थ्य में सुधार हो रहा है. Also Read - Indian Railways/IRCTC: ट्रेनों के लेट होने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त-जिम्मेदारी ले रेलवे और यात्रियों को मुआवजा दे

चिकित्सा आधार पर अंतरिम जमानत को खारिज करते हुए शीर्ष अदालत ने कहा कि वह कोई आदेश पारित करने के इच्छुक नहीं है और अगर चिकित्सा अधिकारियों को लगता है कि मेदांता में उसकी जांच की जरूरत है, तो वे इसके साथ आगे बढ़ सकते हैं.

शीर्ष अदालत ने 24 अगस्त को सीबीआई को 1984 के सिख विरोधी दंगों के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे सज्जन कुमार की चिकित्सा स्थिति की पुष्टि करने का निर्देश दिया. जिन्होंने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए अंतरिम जमानत मांगी थी. पीठ ने कुमार की याचिका पर सीबीआई से जवाब मांगा और जांच एजेंसी को एक सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है.

(इनपुट: IANS)